CC full form aur BCC ka full form kya hai

CC full form aur BCC ka full form kya hai ?

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दोस्तों हम सब ईमेल का इस्तेमाल करते हैं आज के समय में। आपने ईमेल में CC और BCC शब्द जरूर देखें होंगे। आइये जाने हैं CC full form aur BCC ka full form kya hai ?

नीचे दिए हुए फोटो को देखिये – यह गूगल के ईमेल में नया ईमेल लिखने का फॉर्म है। क्या आपको इस फॉर्म में CC और BCC दिख रहा है ?

CC full form aur BCC ka full form kya hai ?

सो आइये दोस्तों पहले CC full form aur BCC ka full form देख लेते हैं फिर आगे और जानेंगे इस शब्द के बारे में।

CC full form – CC को Carbon Copy ( कार्बन कॉपी ) कहते हैं

BCC ka full form – BCC को Blind Carbon Copy ( ब्लाइंड कार्बन कॉपी ) कहते हैं।

अब आपने CC full form और BCC full form जान लिया तो थोड़ा इनके बारे में और समझते हैं।

ईमेल आज की दुनिया में में संचार का पसंदीदा तरीका है, पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों ही जरूरतों में । यह सरल, सीधा, सुरक्षित और वास्तविक समय में होता है। यानि की ईमेल तुरंत अपने गंतव्य पे पहुँच जाता है।

लेकिन, संचार के सभी रूपों के साथ, आपके और आपके प्राप्तकर्ता के बीच संचार व्यवस्थित और सभ्य है, यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ नियम हैं।

ईमेल शिष्टाचार के उन नियमों में से एक में CC (कार्बन कॉपी) और BCC (ब्लाइंड कार्बन कॉपी) का उपयोग शामिल है।

ईमेल में CC aur BCC का क्या मतलब होता है ?

यदि आपने कभी कोई ईमेल भेजा है, तो आप “To” फ़ील्ड के बगल में दो और फ़ील्ड पाएंगे : CC और BCC। जैसा की आप ऊपर फोटो में देख सकते हैं।

तो आसान भाषा में बोले तो अधिक से अधिक लोगो को एक ही ईमेल भेजने के लिए CC aur BCC का इस्तेमाल किया जा सकता है। बस थोड़ा अंतर है दोनों में।

CC क्या होता है ?

ईमेल भेजने में, CC “कार्बन कॉपी” का संक्षिप्त नाम है।

अगर आपको याद हो ईमेल आने से पहले और अभी भी कई सरकारी दफ्तरों में जब आप एक लेटर देते हैं तो कार्बन लगा के लिखते हैं ताकि उसकी एक कॉपी आपके पास रहे या आप किसी और को दे सकें। उसे क्रबों कॉपी कहते थे।

उसी तरह जब आप एक ईमेल की कॉपी कई अन्य लोगों को भेजना चाहते हैं तो आप उनका ईमेल एड्रेस CC में लिखते हैं।

अच्छा “TO” और “CC” में अंतर ये हुआ की जो “TO” में हैं , ईमेल उनके लिए है पर जो “CC” में हैं , यह मेल उनकी जानकारी के लिए हैं।

और “TO” और “CC” में जितने लोग हैं उनको सबको पता होता है की ईमेल किस किस को भेजा गया है।

सो अगर आप किसी ईमेल के “TO” में हैं तो ईमेल आपके लिए हैं।

और अगर आप CC में हैं तो ईमेल आपकी जानकारी के लिए हैं।

सो उम्मीद है की आपको CC full form समझ में आया और क्यों इस्तेमाल होता है यह भी पता चला।

BCC क्या होता है?

BCC का अर्थ है “ब्लाइंड कार्बन कॉपी।”

CC की तरह, BCC दूसरे लोगों को ईमेल की प्रतियां भेजने का एक तरीका है। दोनों के बीच अंतर यह है कि, जब आप सीसी का उपयोग करने पर प्राप्तकर्ताओं की सूची देख सकते हैं, पर BCC के मामले में ऐसा नहीं है।

इसे ब्लाइंड कार्बन कॉपी कहा जाता है क्योंकि अन्य प्राप्तकर्ता यह नहीं देख पाएंगे कि किसी अन्य व्यक्ति को ईमेल की प्रति भेज दी गई है।

आपको सीसी ( CC ) का उपयोग कब करना चाहिए?

सो CC का उपयोग बहस का हिस्सा रहा है।

क्योंकि अगर आपको कई लोगों को ईमेल भेजना है तो आप सबका ईमेल एड्रेस “TO” रख सकते हैं।

तो फिर CC के बारे में क्या खास है?

तो बात ये है की CC का उपयोग करना किसी भी चीज़ से अधिक शिष्टाचार का मामला है।

जैसा मैंने पहले कहा ,सामान्य नियम यह है कि “टू” ( TO ) फ़ील्ड आपके ईमेल के मुख्य प्राप्तकर्ता के लिए आरक्षित है।

अन्य इच्छुक पार्टियों को एक सीसी ( CC ) के रूप में शामिल किया जा सकता है ताकि उनके पास ईमेल की अपनी प्रति हो सके।

पर ये समझ ले की जितने लोग “TO” और “CC” में रहेंगे वो सब एक दुसरे को देख पाएंगे। यानि सबको पता होगा की यह ईमेल और किन किन को भेजा गया है।

आपको BCC का उपयोग कब करना चाहिए?

हाँ BCC का उपयोग एक खास मक़सद से किया जाता है और इसलिए ये समझना बहुत जरूरी है।

जब आप ईमेल की एक कॉपी गुप्त रूप से किसी को भेजना चाहते हैं।

एक अच्छा उदाहरण तब हो सकता है जब आपके किसी कर्मचारी से कोई समस्या हो। आप उसे एक ईमेल भेजते समय, आप ईमेल में अपने मैनेजर या मानव संसाधन को BCC कर सकते हैं ताकि उन्हें आपके पत्राचार की एक प्रति मिल जाए।

इस मामले में, टीम के अन्य सदस्य इसे प्राप्त करेंगे, लेकिन आपके साथी कर्मचारी यह पता नहीं चलेगा की ईमेल की एक कॉपी आपने मैनेजर को भी भेजी है।

जब एक बहुत बड़ी सूची है ईमेल की जिन्हे आप ईमेल की एक कॉपी भेजना चाहते हैं।

जब आप परिवार और दोस्तों की एक बड़ी सूची को एक ईमेल भेज रहे हैं जो एक दूसरे को नहीं जानते हैं, ऐसे में आप BCC का इस्तेमाल कर सकते हैं ।

इसमें आपने किसी एक मुख्या आदमी को या खुद को “TO” में डाल दिया और बाकि सब को BCC में डाल दिया तो सबको यही लगेगा की ईमेल उनके पास ही आया है और ईमेल किस किस को गया है यह पता नहीं चलेगा।

इसलिए इसे ब्लाइंड कार्बन कॉपी कहते हैं।


सारांश

दोस्तों रोजमर्रा की जिंदगी में हम ऐसा बहुत कुछ इस्तेमाल करते हैं जिसके बारे में हमें पता नहीं होता पर या तो किसी ने बता दिया की कैसे इस्तेमाल करें और हम करने लगते हैं। CC और BCC ईमेल के ऐसे ही कुछ फीचर हैं।

उम्मीद करती हों की आपको यह जानकारी CC full form aur BCC ka full form पसंद आये होगी।

अपना कमेंट एंड फीडबैक हमें जरूर दें।


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Lata

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