Raja Ram Mohan Roy Jevani

राजा राम मोहन राय की जीवनी हिंदी में (Raja Ram Mohan Roy Jevani in Hindi)

Biography in Hindi

दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस पोस्ट – राजा राम मोहन राय की जीवनी हिंदी में (Raja Ram Mohan Roy Jevani in Hindi).

राजा राम मोहन राय ( Raja Ram Mohan Roy ) एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थे और ‘आधुनिक भारत के निर्माता’ के रूप में जाने जाते थे।

सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान, उन्होंने ‘ब्रह्म-समाज’ की स्थापना की और एक महान विद्वान और प्रतिभाशाली विचारक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनके प्रयासों के कारण, मुगल सम्राट बहादुर शाह ने उन्हें ‘राजा’ की उपाधि दी थी।

सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन के दौरान, ‘ब्रह्म समाज’ ने सामाजिक सुधार लाने और लोगों को धार्मिक हठधर्मिता के बारे में जागरूक करने के लिए काम किया ।

राजा राम मोहन हमेशा राजनीतिक भेदभाव पर सवाल उठाते थे और बंगाल के जमींदारों की शक्तियों का विरोध करते थे।

उन्होंने ब्रिटिश व्यापारिक अधिकारों के विपरीत लड़ाई लड़ी और 1814 में कोलकाता में बस गए। तो आज में आप को इस आर्टिकल में राजा राम मोहन राय की जीवनी हिंदी में (Raja Ram Mohan Roy Jevani in Hindi) बतायेगे।

पूरा नाम ( Full Name)                                      राजा राम मोहन राय

जन्म दिन (Date of Birth)                                  22 मई 1772

जन्म स्थान (Place of Birth)                               राधानगर गांव हुगली बंगाल 

पिता का नाम  Father Name                             रामकंतो रॉय

माता का नाम Mother Name                                 तैरिनी देवी

राजा राम मोहन रोय का प्रारम्भिक जीवन, परिवार और शिक्षा (Early life, Family and Education of Raja Ram Mohan Roy)

उनका जन्म 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के राधानगर में हुआ था। उनके पिता रामकान्तो राय और माता का नाम तैरिनी देवी था ।

रामकान्तो राय की वैष्णव और माता शैव पृष्ठभूमि थी। भले ही उन्होंने राम मोहन राय को धार्मिक एकरूपता की शिक्षा दी, लेकिन इसने उन्हें धार्मिक सहिष्णु बना दिया।

शुरुआत में, उन्होंने एक स्थानीय स्कूल में प्राथमिक शिक्षा का अध्ययन किया। 15 साल की कम उम्र में ही उन्होंने संस्कृत, अरबी, बांग्ला और फारसी भाषा सीख ली थी।

बहुत कम उम्र में बहुत सी भाषाएँ सीखने ने उन्हें गाँव का एक मेधावी छात्र बना दिया। वह बचपन से ही हिंदू धर्म में बसे अंध विश्वासों की जड़ो को समाप्त करने के कार्य में रहे ।

राजा राम मोहन रोय करियर (Career of Raja Ram Mohan Roy)

18 वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों के दौरान, राजा राम मोहन रॉय ने ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए कलकत्ता में काम करने वाले अंग्रेजों को पैसा उधार देना शुरू किया, जबकि अंग्रेजी अदालतों में ब्राह्मण विद्वान के रूप में अपना काम जारी रखा और ग्रीक और लैटिन का अध्ययन करना शुरू किया।

1803  से 1815 तक, उन्होंने मुर्शिदाबाद में अपीलीय न्यायालय के रजिस्ट्रार थॉमस वुडरोफ के लिए एक ‘मुंशी’ (निजी क्लर्क) के रूप में काम किया।

राजा राम मोहन रॉय ने पद से इस्तीफा दे दिया और फिर ईस्ट इंडिया कंपनी के कलेक्टर जॉन डिग्बी के लिए काम किया।

सामाजिक सुधार राजा राम मोहन रॉय के द्वारा (Social Reforms By Raja Ram Mohan Roy)

उन्होंने समाज में फैले कुरीतियों और अंध्-विश्वासों का पूरजोर विरोध किया था और भारत में कई सामाजिक सुधार किए जिससे समाज को नई दिशा मिली और एक नवयुग की रचना की। वे आधुनिक भारत के जनक भी माने जाते है।

उन्ही के अथक प्रयासों और परिश्रम की वजह से सती प्रथा जैसे बुरी कुरीति का अंत हुआ। शिक्षा प्रणाली में सुधार और आधुनिकरण को बढ़ावा दिया।

राजा राममोहन राय की दूर‍दर्शिता और वैचारिकता के अनेक उदाहरण हमें देखने को मिलते है जिसमे उन्होंने महिलाओ के अधिकार और शिक्षा के लिए भी आंदोलन किया था।

राजा राम मोहन राय के द्वारा सती प्रथा का अंत 

उन्होंने लोगों के बीच जाति विभाजन को खारिज कर दिया और महिलाओं के सती होने की अमानवीय प्रथा के खिलाफ बहुत जोरदार आंदोलन किया।

इसलिए हिंदू परम्परावादी परिवारों ने सती प्रथा के खिलाफ विलियम बेंटिक द्वारा सती प्रथा को ख़तम करने की मंजूरी देने के लिए ब्रिटिश संसद में याचिका दायर की। तब मोहन राय ने भी बेंटिक की कार्रवाई के पक्ष में प्रतिवाद रखा।

अपने जीवन काल के दौरान, उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित किया। उन्होंने शिक्षा को समाज की आवश्यकता माना और महिला शिक्षा के पक्ष में भी कई कार्य किये. 

आत्मीय सभा की शुरुआत राजा राममोहन रॉय ने 1815 में कलकत्ता में की थी। इस सभा द्वारा दर्शन व सामाजिक सुधारों पर चर्चा की जाती थी। 1823 तक यह सभा निष्क्रिय हो गयी थी।

ब्रह्म समाज की स्थापना

1828 में, राय ने ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना की। वह ‘ब्रह्म समाज’ के माध्यम से धार्मिक पाखंडों को उजागर करना चाहते थे और हिंदू समाज पर ईसाई धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहते थे।

राजा राम मोहन राय के प्रयासों का फल तब मिला जब 1829 में सती प्रथा को समाप्त कर दिया गया।

उन्होंने  ने ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना करके लोगों के बीच धर्म की वास्तविक अवधारणा को उजागर करने के लिए बहुत प्रयास किए।

महिलाओ के स्वतंत्रता और अधिकार के लिए 

राजा राम मोहन राय ने महिलाओ के स्वंतंत्रता और अधिकार के लिए भी लड़ाई लड़ी थी और उनका मानना था की महिलाओ को भी समाज में आज़ादी और एक अच्छा स्थान मिलना चाइये और उन्होंने विधवा पुर्नविवाह के लिए भी आंदोलन किया था।

उन्होने लड़को और लड़कियों को एक समान अधिकार और शिक्षा मिलने के लिए काम किए और वो महिलाओ को अपने अधिकार के रक्षा करने के लिए और उनको जीने के आज़ादी और स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए हमेशा प्रेरित किया 

राजा राम मोहन राय के द्वारा शिक्षा में सुधार 

आधुनिक भारतीय इतिहास में उन्होंने शिक्षा में सुधार लाने का प्रयास किया। उनका इरादा था कि आधुनिक शिक्षा हिंदू समाज के पूरे सोच को बदल सकती है।

इसलिए उन्होंने डेविड हरे का सहयोग किया जिन्होंने भारत में पश्चिमी शिक्षा प्रणाली को लागू करने का प्रयास किया। बाद के वर्षों में, उन्होंने कोलकाता में प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज की स्थापना की।

उन्होंने अपनी लागत से कोलकाता में पहला अंग्रेजी स्कूल चलाया। राजा राम मोहन रॉय अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को जानने में रुचि रखते हैं।

स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर राजा राम हमेशा खुलकर अपनी राय रखते हैं, अन्याय और उत्पीड़न किसी भी रूप में हो उसका विरोध करते थे ।

राममोहन युनिवर्सल धर्म, मानव सभ्यता के विकास और आधुनिक युग में समानता के पक्षधर थे.उन दिनों सभी लोग उनके सोच और विचारों का सम्मान करते थे।

राजा राम मोहन राय उपलब्धियां (Achievements of Raja Ram Mohan Roy)

हिंदू धर्म में व्याप्त अंधविश्वास को दूर करने और लोगो के दृष्टिकोण को बदलने की कोशिश की।

  • उन्होंने मूर्ति पूजा और अर्थहीन धार्मिक अनुष्ठानों का विरोध किया।
  • राजा राय ने हिंदुओं को प्रोत्साहित किया कि हिंदू धर्म की सभी धार्मिक पुस्तकें ईश्वर की पूजा का उपदेश देती हैं।
  • उन्हों ने छात्रों को समाज और विभिन्न सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता लाने के लिए कई पुस्तकालयों की स्थापना की।
  • उन्होंने कॉलेज स्तर पर अकादमियों में सुधार लाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों के साथ काम किया।

राजा राम मोहन राय का निधन (Death of Raja Ram Mohan Roy)

27 सितंबर, 1833 को ब्रिस्टल के उत्तर-पूर्व में स्टेपलटन में उनकी मृत्यु हो गई थी। ब्रिटेन की यात्रा के दौरान ही मेनिनजाईटिस हो जाने के कारण अप्रत्याशित निधन हो गया था. ब्रिटेन के ब्रिस्टल नगर के आरनोस वेल क़ब्रिस्तान में राजा राममोहन राय की समाधि है। उस युग में ब्रिटेन में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी, अतः उनके शव को भूमि में यों ही दबा / समाहित कर दिया गया था.

हाल ही में, ब्रिटिश सरकार ने महान सुधारवादी की स्मृति में ब्रिस्टल में एक सड़क का नाम रखा है । ब्रिस्टल नगर में एक प्रमुख स्थान पर चमकीले काले पत्थर से बनी राजा राममोहन राय की लगभग दो मंजिला ऊँचाई की एक प्रतिमा भी स्थापित है, जिसमें में वे पुस्तकें हाथ में पकड़े खड़े हैं.

राजा राम मोहन एक महान समाज सुधारक थे। वे आधुनिक भारत के निर्माता, सबसे बड़ी सामाजिक – धार्मिक सुधार आंदोलनों के संस्थापक थे। इसके अलावा वह अंग्रेजी, आधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी और विज्ञान के अध्ययन को लोकप्रिय भारतीय समाज में विभिन्न बदलाव की वकालत के लिए भी जाने जाते है यही कारण है कि उन्हें दिल्ली के मुगल साम्राज्य द्वारा “राजा” की उपाधि दी गयी थी. 1829 में दिल्ली के राजा अकबर द्वितीय ने उन्हें ये उपाधि दी थी. और वो जब उनका प्रतिनिधि बनकर इंगलैंड गए तो वहां के राजा विलियम चतुर्थ ने भी उनका अभिनंदन किया।

आज भी हमारे समाज में बहुत सी कुरीतिया है लेकिन अगर हम आज राजा राम मोहन रॉय की दूरदर्शिता और उनके वैचारिक मतों को अपने जीवन का हिस्सा बना ले तो मुमकिन है समाज में एक नया बदलाव आ सकें , जहा पर महिलाओ को भी आज़ादी और सारे अधिकार मिलें जो पुरुषों को समाज में दिए हैं।

आज का यह आर्टिकल राजा राम मोहन राय की जीवनी हिंदी में (Raja Ram Mohan Roy Jevani in Hindi) कैसा लगा हमें कमेंट सेक्शन में बताइये और अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा तो आप इसे अपने दोस्तों और परिवार वालो के साथ शेयर करें !


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Lata

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